बाराबंकी, अप्रैल 30 -- फतेहपुर। जैनाचार्य मुनि विशल्य सागर जी महाराज संघ के साथ गुरुवार को नगर के श्रीपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पधारे। श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण अगवानी की। मुनिश्री ने विधि -विधान से भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन किए। श्रद्धालुओं को धर्मलाभ प्रदान किया। इस अवसर पर प्रवचन में मुनि विशल्य सागर जी ने जैन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नित्य नियमों का पालन ही सच्चे अर्थों में पुण्य अर्जन का मार्ग है। उन्होंने जैन जीवनशैली की विशेषताओं को बताते हुए कहा कि जैन होने की पहचान केवल नाम या परंपरा से नहीं, आचरण से होती है। रात्रि भोजन का त्याग, जल छानकर पीना, जीवों के प्रति करुणा भाव रखना और प्रतिदिन देव दर्शन करना जैन धर्म के मूल आचरण हैं। यह भी पढ़ें- इतना आसान होता, तो हर घर में एक दिगम्बर संत होता [दिगम्बरत्व-एक अ...