रुडकी, अप्रैल 9 -- प्रदेश में एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही पुस्तक बाजार में भीड़ बढ़ गई है, लेकिन इस बार अभिभावकों की परेशानी भी बढ़ी है। निजी स्कूलों द्वारा तय की गई दुकानों पर ही किताबें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे अभिभावकों को मजबूरी में मनमाने दामों पर खरीदारी करनी पड़ रही है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के बीच आपसी तालमेल के चलते विकल्प सीमित कर दिए गए हैं। निर्धारित दुकानों के अलावा कहीं और से किताबें लेना संभव नहीं है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो शिक्षा का बढ़ता व्यवसायीकरण आम परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित...