औरंगाबाद, जनवरी 14 -- निजी विद्यालयों में वास्तविक रूप से अध्ययनरत बच्चों का नाम सामूहिक रूप से निरस्त करने के मामले में बिहार पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर संघ सवाल उठाया है। जिलाध्यक्ष अजय पांडे ने कहा कि यह कार्य नियम, पारदर्शिता और नैतिकता के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि निजी विद्यालयों के पास बच्चों के आई-कार्ड, उपस्थिति रजिस्टर और अन्य शैक्षणिक अभिलेख स्पष्ट रूप से उपलब्ध थे, इसके बावजूद बिना अभिभावकों की स्वतंत्र सहमति, बिना भौतिक सत्यापन और बिना लिखित साक्ष्य के नामांकन निरस्त कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान अभिभावकों पर दबाव बनाया गया कि बच्चों का नाम सरकारी विद्यालय में ही बने, जबकि वे वास्तविक रूप से निजी विद्यालय में पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि यह न केवल अभिभावकों के अधिकारों का हनन है बल्कि बच्चों...
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