लखनऊ, अगस्त 14 -- निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर वसूली जा रही फीस और अन्य खर्चों में भारी अंतर पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर चिंता जताई है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को इस मामले को देखना होगा। इसके लिए चाहे कोई नया कानून बनाने की जरूरत हो या मौजूदा कानूनों में संशोधन करना आवश्यक हो, ताकि अत्यधिक शुल्क वसूल कर आम आदमी को लूटे बिना, उसे पर्याप्त और उचित चिकित्सा उपचार प्राप्त हो सके। न्यायालय ने सरकारी सहायता से स्थापित निजी अस्पतालों का जिलेवार ब्योरा भी मांगा है। इसमें रियायती दर पर दी गई जमीन या अन्य सरकारी लाभ, उनके साथ लगाई गई शर्तें तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को रियायती दर पर इलाज देने की व्यवस्था की जानकारी शामिल है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी。

न्यायालय की टिप्पणी न्यायम...