लखनऊ, नवम्बर 15 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता लखनऊ व नोएडा समेत कई शहरों में लागू किए गए वर्टिकल सिस्टम को संघर्ष समिति ने निजीकरण की साजिश करार दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि इस सिस्टम से बिजली की व्यवस्था के चरमराने की सारी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उपभोक्ताओं और अभियंताओं के विरोध के बावजूद कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने निजीकरण के लिए सभी संवर्गो के हजारों पदो समाप्त कर दिए हैं। वर्टिकल सिस्टम एक विफल प्रयोग है, जिसे प्रबंधन अपने स्वार्थ में लागू कर रहा है। सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों को सीएजी ऑडिट से मुक्त रखा है। ऐसे में लाभ हानि का सही लेखा जोखा नहीं मिल पाता है और निजी कंपनियों को मिलने वाले मुनाफे का आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं मिलता।
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