कानपुर, अगस्त 5 -- निकाह से पहले युवकों-युवतियों को अब एक ऐसी ट्रेनिंग दी जाएगी जो शादी के बाद रिश्तों को निभाने, पारिवारिक कलह रोकने, परिवार को एकजुट रखने, तलाक या खुला (पत्नी के स्तर से दी जाने वाली तलाक) को खत्म या सीमित करने, सास और नंदों ने बेहतर रिश्ते रखने में कारगर साबित हो। ट्रेनिंग के दरवाजे पति-पत्नी के लिए भी खोले गए हैं। जमीअत उलमा ए हिंद अपनी तरह की इस पहली ट्रेनिंग की शुरुआत कर रही है जिसमें शुल्क भी रखा गया है। आमतौर पर जमीअत के सभी जलसे निशुल्क रहते हैं। गूगल फॉर्म से पंजीकरण कराए जा रहे हैं। मस्जिद के इमामों के इसके लिए जागरूक करने का आग्रह किया गया है। अब तक बड़ी संख्या में पंजीकरण भी हो गए हैं। जमीअत उलमा के मोहकम ए शरिया (शरई अदालत या शरई पंचायत) और इस्लाहे मआशरा (समाज सुधार) इकाई को यह पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस...