प्रयागराज, मार्च 12 -- प्रयागराज। बदलती जीवनशैली के कारण किडनी रोग की समस्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, जब किडनी 80 से 90 फीसदी तक खराब हो जाती है व शरीर से गंदगी बाहर नहीं निकाल पाती तब डायलिसिस करने की जरूरत पड़ती है। लेकिन यदि डायलिसिस शुरू होती है तो उस मरीज को अधिकतर उसी पर निर्भर होना पड़ता है। कॉल्विन और बेली अस्पताल में 2018 में पीपीपी मॉडल पर नि:शुल्क डायलिसिस सेवा शुरू की गई थी, जो गरीब मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। क्योंकि निजी अस्पताल में एक माह में लगभग एक लाख रुपये डायलिसिस कराने में खर्च आता है। ...अप्रैल तक दो बेड और बढ़ा दिए जाएंगेकॉल्विन अस्पताल के प्रबंधक वैभव सक्सेना ने बताया कि कॉल्विन की डायलिसिस यूनिट में इस समय 18 बेड हैं, जबकि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अप्रैल तक दो बेड और बढ़ा दिए जाए...