लखनऊ, जून 10 -- राजधानी की सड़कों पर ऑटो और ई-रिक्शा यातायात व्यवस्था के लिए नासूर बन गए हैं। इंदिरा नगर से चारबाग, आलमबाग सेगोमतीनगर, निशातगंज से चौक और अमीनाबाद तक हर चौराहे पर इनकी मनमानी आम है। उल्टी दिशा में दौड़ना, बीच सड़क पर यू-टर्न लेना, नो-पार्किंग जोन में सवारी भरना रोज का नजारा है। मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर और डीजीपी का कार्यालय लखनऊ में होने के बावजूद इस मनमानी पर रोक के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। नतीजतन महिला यात्रियों से बदसलूकी और उनकी हत्या तक करने में चालक गुरेज नहीं कर रहे। शासन और प्रशासन की निष्क्रियता ने यात्रियों को सीधे "हैवान चालकों" के हवाले कर दिया है। 10-12 लाख यात्रियों की परवाह नहीं

एक अनुमान के मुताबिक एक अनुमान के मुताबिक लखनऊ में रोजाना 10 से 12 लाख लोग ऑटो और ई-रिक्शा से सफर ...