मेरठ, जून 13 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में शनिवार को सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक किया गया तत्पश्चात शांतिधारा लवी जैन, सुनील जैन, मंजू जैन, मनी जैन, प्रवीन जैन, प्रियंक जैन आदि ने की। विधान के मध्य आचार्य सौम्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि अपने अपने क्षेत्र में स्त्री व पुरुष दोनों की उपयोगिता है। परंतु पुरुष की जननी होने के नाते स्त्री जाति का महत्व और भी बढ़ जाता है। पुरुषों में प्रारंभिक संस्कार का बीज बोने वाली ही स्त्री ही है। मां का उपकार अविस्मरणीय होता है। नारी इस सृष्टि की अतुल्य स्नेह संपदा है। यह भी पढ़ें- बिना आराधना मनुष्य की भावनाओं में शुद्धि नहीं आ सकती : सौम्य सागर आज जो अत्याचार नारी पर हो रहे है वो अक्षम्य है और नारी पर अत्याचार करने वाला व्यक्ति ...