नई दिल्ली, फरवरी 18 -- यह बहुत दुखद और शर्मनाक है कि सड़कों पर नाबालिग वाहन चालकों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के द्वारका में जो त्रासद हादसा हुआ था, उसकी चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही है। 23 वर्षीय साहिल धनेश्रा की मौत केवल उनकी बिलखती माता के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए चिंता की बात है। ऐसा क्यों होता है कि अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों को वाहन थमा देते हैं? वैसे, ऐसे मामलों में दोषी नाबालिग के लिए ही नहीं, उनके अभिभावक के लिए भी सजा तय है। फिर भी नाबालिग वाहन चालकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके लिए कितने अभिभावकों को जेल हुई है? ऐसा कौन दोषी अभिभावक है, जो अधिकतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और तीन साल की सजा भुगत रहा है? क्या कानून केवल दिखावे के लिए बनते हैं और जब किसी अभिभावक को सजा देने की बात ...
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