प्रयागराज, अप्रैल 16 -- मोतीलाल मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से गुरुवार को एक्स्ट्रा पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस (ईपी-टीबी) के निदान और प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की गई। वक्ताओं ने टीबी प्रबंधन में आए बदलाव, शीघ्र पहचान, टीबी के निदान पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता नई दिल्ली के हिन्दुस्तान लेटेक्स फैमिली प्लानिंग प्रमोशन ट्रस्ट (एचएलएफपीपीटी) के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. मयंक मित्तल ने कहा कि ईपी-टीबी शरीर में बाल और नाखून को छोड़कर किसी भी अंग में हो सकती है। बीमारी की जांच और उपचार की सुविधा सरकारी व निजी अस्पतालों में उपलब्ध है। जिला टीबी अधिकारी डॉ. हेमंत सिंह ने कहा कि सामान्य टीबी में जहां फेफड़ा प्रभावित होता है, वहीं ईपी-टीबी में कोई भी गांठ, हड्डी, पेट, आंख, सिर, त्वचा भी प्रभावित हो सकता है। यह भी पढ़ें- एमएलएन कॉलेज में टीबी ...
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