रांची, अप्रैल 3 -- भारत में जनगणना को लेकर आदिवासी समुदायों, विशेषकर संताल आदिवासियों ने अपनी धार्मिक पहचान को लेकर निर्णायक रुख अख्तियार कर लिया है। संताल आदिवासियों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था द्वारा आयोजित पंचायतों में यह सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि जनगणना प्रपत्र में अलग कोड या विशेष कॉलम की अनुपस्थिति के बावजूद समाज के सभी लोग धर्म के स्थान पर सरना ही लिखेंगे। यह निर्णय उस स्थिति में लिया गया है, जब सरकार ने स्पष्ट किया कि अगली जनगणना में केवल छह धर्मों-हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिख और जैन को ही अलग विकल्प के रूप में रखा जाएगा। आदिवासियों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि वर्षों की मांग के बाद भी उनके लिए कोई आधिकारिक कोड आवंटित नहीं किया गया है। माझी परगना महाल के माझी बाबा भुगलू सोरेन का तर्क है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद ...