नई दिल्ली, अप्रैल 17 -- महिला आरक्षण देने के तरीके और परिसीमन पर सहमति न बनना आश्चर्यजनक नहीं, पर चिंताजनक जरूर है। संविधान में संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए, पर यह अभी केंद्र मेंं सत्तारूढ़ गठबंधन के पास नहीं है। सरकार बहुत प्रयास के बावजूद तीन विधेयकों को पारित कराने में नाकाम रही है। यह बात बहुत मुखरता से सिद्ध हुई है कि विपक्ष के नेताओं में सत्ता पक्ष के प्रति विश्वास की भारी कमी है। सत्ता पक्ष के प्रति एकजुट विपक्ष की तल्खी गौर करने लायक है। बहुत कम अवसर आए हैं, जब विपक्ष में ऐसी एकता दिखाई पड़ी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के भाषण में वर्तमान सत्ता या भाजपा विरोध का जो स्तर देखा गया है, उसमें सहमति बनाने की राह कतई आसान नहीं है। यह लोकतंत्र और संविधान का एक सशक्त पहलू है कि अगर किसी सरकार के ...