नई दिल्ली, जून 1 -- श्याम नारायण लाल,प्रोफेसर, आईआईएम, जम्मू जम्मू-कश्मीर की कहानी लंबे समय तक आतंकवाद, सीमा पार से प्रायोजित हिंसा और राजनीतिक चुनौतियों के संदर्भ में लिखी जाती रही है। हालांकि, गोलियों और बारूदी धमाकों की आवाजों के बीच एक ऐसे खतरे की आहट को अक्सर अनसुना कर दिया गया, जो खामोशी से समाज को भीतर से कमजोर कर रहा था। यह खतरा घरों, विद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुंचकर युवाओं के सपनों को अपनी गिरफ्त में ले लेता और धीरे-धीरे परिवारों की खुशियां, समाज की नैतिक शक्ति और भविष्य की संभावनाओं को क्षीण कर देता। वर्ष 2021 में जम्मू-कश्मीर में करीब 145 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1,015 करोड़ रुपये थी। तस्करी कर लाया गया मादक पदार्थ यहां से देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंचता है। सुरक्षा से जुड़े लोग बताते है...