बाराबंकी, जुलाई 10 -- बाराबंकी, संवाददाता। शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए भले ही स्वास्थ्य विभाग के तमाम कार्यक्रम चल रहे हों, लेकिन जागरुकता की कमी और महिलाओं में नशे की लत से कोख में ही शिशुओं का दम घुट रहा है। विगत वर्ष शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों पर गौर करें तो जन्म से पहले ही कोख में 198 शिशुओं की मौत हो चुकी है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की देखभाल के लिए आशा, आंगनबाड़ी व एएनएम की मजबूत कड़ी है। पंजीकरण, टीकाकरण से लेकर समय-समय पर सीएचसी, पीएचसी व जिला महिला अस्पताल में जांच और उपचार शुरू कराया जाता है। पोषण आहार के लिए गर्भवती माताओं को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना में तीन किस्तों में पांच हजार रुपये के साथ ही जननी सुरक्षा योजना के तहत शहरी क्षेत्र की प्रसूता को एक हजार और ग्रामीण क्षेत्र की ...