पूर्णिया, मार्च 23 -- जलालगढ़, एक संवाददाता।नवरात्रि के चौथे दिन जलालगढ़ प्रखंड के विभिन्न मंदिरों एवं घरों में मां कुष्मांडा की पूजा पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ की गई। सुबह से ही पूजा स्थलों पर भक्तों की भीड़ देखने को मिली और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। पंडित गणेश झा ने बताया कि मां कुष्मांडा को ब्रह्मांड की रचयिता आदिशक्ति माना जाता है, जिन्होंने अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि की रचना की। उनकी पूजा करने से सुख, यश, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। उन्होंने बताया कि इस दिन स्नान के बाद पीले और हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा में धूप, गंध, अक्षत, पीले फूल अर्पित किए जाते हैं तथा विशेष रूप से मालपुआ या कुम्हड़े से बनी मिठाई 'पेठा' का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि मां कुष्मांडा की कृपा से शारीरिक कष्ट दूर...