नई दिल्ली, फरवरी 6 -- नवजोत कौर सिद्धू का हालिया खुलासा कि उन्होंने अपने कैंसर के इलाज के दौरान गौमूत्र का उपयोग पीने और नहाने के लिए किया, स्वास्थ्य जगत में एक नई बहस की वजह बन गया है। एक तरफ जहां व्यक्तिगत आस्था और पारंपरिक उपचारों पर भरोसे की बात है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञ इसे एक जोखिम भरा कदम मान रहे हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे किसी व्यक्ति के अनुभव निश्चित रूप से सहानुभूति के पात्र होते हैं, लेकिन जब बात सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैज्ञानिक प्रमाणों की आती है, तो ऑन्कोलॉजिस्ट्स की चेतावनी को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। यह भी पढ़ें- प्रोस्टेट कैंसर रोगी यौन स्वास्थ्य और मूत्र संबंधी समस्याओं को ऐसे रखें कंट्रोल हिंदू धर्म में गाय को पवित्र (गोमाता) मानकर उसके मूत्र (गौमूत्र) का उपयोग 'पंच...
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