बलिया, मई 27 -- बलिया, संवाददाता। जनपद में मध्यम और लघु डाल की कुल 96 नहरें 615.980 किमी में फैली हैं। इन नहरों से खरीफ सीजन में 36 हजार 635 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होती है। फिर भी नर्सरी डालने के पिक सीजन रोहिणी नक्षत्र (मई महीने के अंतिम सप्ताह) में सभी नहरों में धूल उड़ रही है। लिहाजा किसान अगैती प्रजाति के धान की नर्सरी डालने को लेकर बेहद चिंतित हैं। मध्य-पूर्व की जंग के बाद डीजल के भाव असामान छूने के साथ ही आसानी से नहीं मिल रहा है। बिजली आपूर्ति भी बदहाल है। ऐसे में किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि 15 मई के बाद नहरों में पानी छोड़ दिए जाने से नर्सरी डालने से पहले खेतों की सिंचाई हो जाती है, जिससे खर-पतवार नौतपा में सूख जाते थे। यह भी पढ़ें- सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से किसान चिंतित इस साल अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है।पूर...