गिरडीह, अक्टूबर 8 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से 20 की निर्वाणभूमि सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेदशिखरजी मधुबन में लंबे समय से साधनारत आचार्य निरंजन सागर जी महाराज समाधि मरण को प्राप्त हुए। मंगलवार देर रात बिसपंथी कोठी में साधनारत आचार्य श्री ने साधु-साध्वियों के मंगल सानिध्य में नमोकार महामंत्र का श्रवण करते हुए शांतिपूर्वक देह त्याग किया। इसकी सूचना मिलते ही मधुबन में शोक और श्रद्धा का वातावरण बन गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिसपंथी कोठी पहुंचकर आचार्य श्री के अंतिम दर्शन कर नमन करने लगे। आचार्य श्री के समाधि मरण की खबर के बाद मधुबन में साधु-संतों, जैन तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं का जुटान होने लगा। श्रद्धालुओं ने उनके संयम, साधना, तप और त्यागमय जीवन को स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।

आचार्य की यात्...