अररिया, जनवरी 8 -- अररिया, संवाददाता नदियां स्थानीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा होती हैं। उनके सूखने, सिकुड़ने, विलुप्त होने या प्रदूषित होने से कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और रोज़गार पर सीधा और विनाशकारी असर पड़ता है, जिससे समुदायों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है। इधर कुछ वर्षों में जिले के कई नदियों, धारों व जलाशयों के सूखने, सिकुड़ने व विलुप्त होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। क्योंकि जिले की बहुत सारी ऐसी छोटी बड़ी नदियां हैं जिन से मछली निकल कर स्थानीय मछुआरे अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी की व्यवस्था करते थे, वे या तो विलुप्त हो गई हैं या फिर विलुप्त की कगार पर हैं। नदियों पर गहराए संकट ने केवल आस पास के मछुआरों का ही रोजगार नहीं छीना है, बल्कि मछली पकड़ने का जाल बनने वालों का भी रोजगार समाप्त होता जा रहा है। पैकटोला के ...
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