रांची, जनवरी 14 -- रांची, विशेष संवाददाता। युगांतर भारती, नव चेतना ग्रामीण संस्थान, नेचर फाउंडेशन, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट, जल जागरुकता अभियान के संयुक्त तत्वावधान में स्वर्णरेखा महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन स्वर्णरेखा नदी के उद्गमस्थल रानीचुआं में नदी का विधि-विधान से पूजन हुआ। मौके पर अंशुल शरण ने कहा कि महाभारतकाल में पांडवों ने जब नगड़ी के इस गांव में अज्ञातवास गुजारा, तब माता कुंती को प्यास लगी थी। तब अर्जुन ने धरती पर तीर चलाया, जिससे जमीन से जलधारा निकली थी। यही आज भी चुआं के तौर पर मौजूद है। बगल में ही एक कुआं भी है। कहा कि नदियां मानव सभ्यता की जननी हैं। नदियां समाप्त हुईं तो मानव सभ्यता भी खत्म हो जाएगी। उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की कि स्वर्णरेखा महोत्सव को राजकीय मेला घोषित करे। नदी के उद्गम स्थल रानीचुआं को एक महत...
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