कटिहार, जनवरी 7 -- नीरज कुमार, कटिहार, निज प्रतिनिधि नदियों के सूखने या प्रवाह कम होने से सभ्यता और संस्कृति भी सूखने लगती है l कटिहार सहित सीमांचल क्षेत्र में दर्जन भर नदियां या तो पूरी तरह सूख चुकी है या अब पानी नहीं के बराबर रह गया है l इस कारण जैव विविधता का संकट भी गहरा रहा है l कई जलीय जीव जंतु, वनस्पति और पौधे विलुप्त हो रहे हैं l इससे परिस्थितिकी तंत्र में भी असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है l नदियों का अस्तित्व खत्म होने से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत असर हो रहा है l कटिहार की बात करें तो दो दशक पूर्व तक स्थानीय नदियों और तालाब में पायी जाने वाली देसी मछली भी नहीं मिलती है l नदियों के सूखने से तापमान में भी वृद्धि हरियाली कम होने के कारण हो रही है l गहरा रहा जैव विविधता का संकट जैव विविधता मानव जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण...