उरई, जून 8 -- उरई। संवाददाता एआरटीओ विभाग से हटकर बड़े वाहनों (कामर्शियल) की फिटनेस व्यवस्था प्राइवेट हाथों में जाने से ट्रक संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई है। जिस ट्रक की फिटनेस पुरानी व्यवस्था में चार से पांच हजार रुपये में हो जाती थी, आज उसके लिए तीन गुने से अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। भागदौड़ी जैसी परेशानी अलग से हो रही है। इससे ट्रक संचालकों की हालत खराब है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था ने इतने नियम कायदे निकाल दिए कि ट्रकोंं की फिटनेस करना अब जी का जंजाल हो गया है। यह भी पढ़ें- ट्रकों में जीपीएस लगना हुआ अनिवार्य, जिले में थमे वाहनों के पहिएनई व्यवस्था का प्रभाव शासन ने बडे़ वाहनों की फिटनेस व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। अब इसे प्राइवेट हाथों में सौंप दिया है। जब से यह खबर जिले के ट्रक संचालकों को लगी हैं, उनके होश फाख्ता है। लंबे...