वाराणसी, अगस्त 6 -- वाराणसी। देवाधिदेव महादेव का सर्वाधिक प्रिय एवं वर्षा ऋतु का प्रमुख मास, सावन सिर्फ प्रकृति को ही पल्लवित-पुष्पित नहीं करता अपितु सनातनी संस्कारों के पल्लवन का भी महीना साबित हो रहा है। इसका एक उदाहरण बिहार के आरा से आए किशोरवय कांवरियों का दल है। एक ही खानदान के उन कांविरयों में उनके परिवार की बुजुर्ग ने काशी महात्म्य के बीज बोए हैं। इस मनाही के साथ कि काशी का गंगाजल काशी से बाहर नहीं ले जाना चाहिए। इस मनाही का उन्होंने मान भी रखा। दल नायक वीरेंद्र कुमार की उम्र 17 वर्ष है। दल के बाकी सदस्य उनके छोटे भाई हैं। यह भी पढ़ें- बाबा धाम के लिए कांवरियों का जत्था रवाना वीरेंद्र ने जब सावन में बाबा विश्वनाथ को जल चढ़ाने की इच्छा व्यक्त की तो उत्साह में उसने यह भी कह दिया कि हम दादी के लिए काशी से गंगाजल भी ले आएंगे। उनके माता...