वाराणसी, फरवरी 13 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। ध्रुपद तीर्थ तुलसीघाट गुरुवार को शास्त्रीय संगीत के विशिष्ट तंत्र वाद्यों की ध्वनि तरंगों से पूरी रात तरंगित होता रहा। अफगान के रबाब से विकसित सरोद की गूंजती भारी और गहरी ध्वनि अपना प्रभाव छोड़ती तो कभी सुरबहार से मुखर होती मीड़ अनूठा अनुभव करा रही थी। यही नहीं श्रोता रुद्रवीणा की झनकार पर सम्मोहित हुए तो पखावज से उपजते तालों में तल्लीन हुए। महाराज बनारस विद्या न्यास की ओर से आयोजित 52वें ध्रुपद मेला की दूसरी संध्या में कुल 10 में छह प्रस्तुतियां तंत्र और चर्म वाद्य वादन की रही। पक्की गायिका का प्रतिनिधित्व चार कलाकारों ने किया। संध्या की पहली प्रस्तुति काशी के डॉ.आशीष जायसवाल के गायन की रही। उन्होंने राग बिहाग में आलाप के साथ धमार रचना 'कहां से तुम मद पी आये हो' से किया। इसके बाद सूल ताल में...
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