मिर्जापुर, मार्च 13 -- मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी के आंगन में फूलों की खुशबू, घंटियों की ध्वनि और जयकारों के साथ एक अलग ही दुनिया बसी है। माला-फूल और पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदार खुद को विंध्यधाम का मेजबान मानते हैं। मां के दरबार तक आस्था की डोर जोड़ना- उनका रोज का काम है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा से दुखी है। उनका सवाल है कि वे श्रद्धालुओं का सत्कार और जरूरतें पूरी करते हैं, फिर भी उपेक्षा क्यों? जगत जननी के द्वार पर सुविधाओं की कमी सालती है। वे सिर्फ थोड़ी छांव, साफ-सुथरा वातावरण और सम्मान के साथ रोजी-रोटी चलाने की सुविधा चाहते हैं। मां विंध्यवासिनी के धाम में हर दिन हजारों श्रद्धालु अपनी मुरादें लेकर आते हैं। जयकारों और भक्ति की गूंज के बीच यहां एक अलग दुनिया बसती है उन छोटे दुकानदारों की, जिनकी रोजी-रोटी मां के दरबार से ही जुड़ी हु...
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