चंदौली, दिसम्बर 16 -- चंदौली, संवाददाता। वर्तमान समय धान के फसलों की कटाई हो जाने के कारण उन क्षेत्रों में धान की टिड्डियां गेहूं के कोमल पौधों को क्षति पहुंचा रही है। कुछ छिटपुट खेतों में ही गेहूं की बुआई हुई है। ऐसे में उनको हरे पौधे मात्र गिने चुने खेतों में मिल रहे है। यह उन खेतों में गेहूं के पौधे काटते खाते देखने को मिल रही हैं। इससे बचाव के लिए किसान विभिन्न उपाय कर सकते हैं। जिला कृषि रक्षा अधिकारी स्नेह प्रभा ने किसान मेढ़ों के खरपतवारों की साफ-सफाई रखें। अपने खेत की नियमित निगरानी करते रखें। यदि फसल सिंचाई करने की अवस्था में हो तो सिंचाई कर दें। नीम आयल 1500 पीपीएम की 2-5 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी की दर या क्लोरपाईरिफॉस 1.5 प्रतिशत डीपी 25 किग्रा हेक्टेयर अथवा लेम्डा-साइहैलोथ्रिन 2.5 प्रतिशत ईसी 500 मिली हेक्टेयर के हिसाब से 3...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.