वाराणसी, मार्च 29 -- वाराणसी। काशी संगीत कला महोत्सव की विराम निशा का शृंगार बनारस घराने के संगीत साधकों ने अपने श्रमसीकरों से किया। शीतल वातावरण में भी संगीत से उत्पन्न ऊर्जा ने माहौल में गरमाहट बनाए रखी। इस निशा को आरंभ में विदुषी सुचरिता गुप्ता ने अपने सुरों से सजाया। प्रथमार्द्ध के अंतिम चरण में रितेश-रजनीश मिश्र की रागदारी इस निशा की सबसे बड़ी यादगारी बन गई। दिल्ली से आए पं. रितेश-रजनीश मिश्र ने पं. हनुमान प्रसाद मिश्र की परंपरा को विस्तार देते हुए अपने पिता स्मृतिशेष पद्मभूषण पं. राजन मिश्र की विशिष्टताओं को भी अपने गायन में शरीक किया। आलाप के दौरान स्वरों का विस्तार रहा हो अथवा गायन के अगले चरण में रागदारी और चैनदारी का पक्ष रहा हो। गायन में गमक और तानों का सिलसिला विशेष हरकतों के साथ विशेष रूप से प्रभावी हो उठा। उन्होंने राग जोगकौ...