शामली, जून 29 -- निर्मलायतन तीर्थ प्रणेता आचार्य श्री 108 नयन सागर मुनिराज का ननौता तीर्थ से एटा चातुर्मास के लिए विहार करते हुए रविवार को एक दिवसीय प्रवास पर शामली में मंगल प्रवेश हुआ। जैन धर्मशाला में आयोजित प्रवचन में उन्होंने कहा कि धर्म केवल सुनने, बोलने या चर्चा करने का विषय नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना ही सच्ची साधना है। प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा कि संसार का प्रत्येक जीव सुख चाहता है और दुख से बचना चाहता है, लेकिन जीवन में मिलने वाले सुख-दुख हमारे पूर्व जन्मों और पूर्वकृत कर्मों का परिणाम हैं। केवल इच्छा करने से कर्मों का उदय समाप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि सभी जीवों के सुख की कामना करना ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है, किंतु व्यवहार में जब किसी विरोधी, पड़ोसी या प्रतिद्वंद्वी की उन्नति होती है तो मन प्रसन्न नहीं होता। यही सिद...