मेरठ, जनवरी 12 -- गांधी आश्रम चौराहा स्थित दशावतार भगवान परशुराम मंदिर में हो रही कथा में सोमवार को कथावाचक ने सात्विक ज्ञान और सात्विक भाव का महत्व बताया। कथा स्थल पर विधि विधान से मनोहर जौहरी और राजीव गौड़ ने व्यास पूजन कराया। पूजन के बाद कथावाचक स्वामी अनंतानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सात्विक ज्ञान में सात्विक भाव से ही प्रवेश होता है, इसलिए हमारी इंद्रिय और मन सात्विक हों। धर्म की स्थापना उच्चारण से नहीं उच्च आचरण से होती है। गुरु अनुशासन में रहने वाले साधक को ही ज्ञान प्राप्त होता है। भगवान के आश्रय का बल जिसके पास होता है, उसे कोई परिस्थिति विचलित नहीं करती। धर्मनिष्ठ मनुष्य को अनंत विजय की प्राप्ति होती है। हमारा मन संसार के विषयों से निकलकर भगवान में लग जाना चाहिए। जहां हमारे मोह और ममता पर प्रहार न हो, वह सत्संग नहीं। श्रीमद्भगव...