प्रयागराज, जनवरी 23 -- संगम की रेती पर वसंत पंचमी के अवसर पर कठोर साधना भी शुरू कर दी गई है। खाकचौक क्षेत्र में तपस्वी नगर के संतों की जलते हुए उपलों के बीच बैठकर शुरू हुई तपस्या अब गंगा दशहरा तक चलेगी। इस दौरान ये संत इन्हीं उपलों के बीच बैठेंगे और विश्व शांति व धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करेंगे। किसी संत ने आठ उपलों को जलाया तो किसी ने 16 और किसी ने 108 उपले अपने आसपास रखे। कुछ संतों ने तो इसे सिर पर धारण किया। महामंडलेश्वर गोपालदास ने बताया कि यह सदियों की परंपरा है। जिसके तहत लोग घोर साधना करते हैं। उपलों के बीच बैठकर यह तप सालों साल तक की जाती है। गंगा दशहरा के अवसर पर इसका विसर्जन किया जाता है। इस बार संगम की रेती से 160 संतों ने इस कठोर तप को शुरू किया है। जबकि सालों से इस साधना में लीन संतों ने एक बार फिर इस तप को किय...
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