नई दिल्ली, मार्च 24 -- धर्मांतरण और अनुसूचित जाति के दर्जे से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला दूरगामी और सराहनीय है। शीर्ष अदालत ने साफ-साफ कहा है कि हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म को छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले इस समुदाय के व्यक्ति को अनुसूचित जाति वाली सुविधाएं नहीं मिलेंगी। अदालत ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें हाईकोर्ट ने ईसाई धर्म अपना चुके एक व्यक्ति की एससी-एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत संरक्षण की मांग को खारिज कर दिया था। निस्संदेह, वह उचित फैसला था। आखिर स्वेच्छा से कोई धर्म-परिवर्तन कब करता है? जब वह नए धर्म से प्रभावित होता है या फिर अपने मूल धर्म के किसी विद्रूप से हमेशा के लिए मुक्ति चाहता है! जिस धर्म की जाति-व्यवस्था से दुखी हो उसे छोड़कर आप किसी अन्य धर्म को अपनाते ...