नई दिल्ली, अगस्त 30 -- शिक्षक और पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 23-24 जुलाई की दरमियानी रात बीजेपी नेता जेपी नड्डा के हाथों जूस पीकर 26 दिन से चल रही अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी थी। हालांकि, उस समय आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी नहीं हुई थी। अब सोनम वांगचुक ने एक इंटरव्यू में बताया है कि आखिर उन्होंने इस्तीफे की मांग को पीछे क्यों किया और उस समय उनके सामने सबसे बड़ा डर क्या था।दिल्ली में बढ़ रही हिंसा था सबसे बड़ा डर 'प्रखर गुप्ता एक्सपीरियंस' नामक पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा, "21 जुलाई के बाद मैंने इस्तीफे को प्राथमिकता से नहीं देखा। इसके बाद 23 तारीख को मैं दो चीजें देख रहा था। एक तरफ बहुत ज्यादा हिंसा हो रही थी। साथ ही इस इस्तीफे की वजह से उनको (सरकार) बह...