नई दिल्ली, जनवरी 20 -- सुहेल हामिद नई दिल्ली। क्या मुस्लिम राजनीति बदल रही है। यह सवाल लाजिमी है, क्योंकि सपा, बसपा, एनसीपी और कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष राजनीति पर भरोसा करने वाले मुस्लिम मतदाता एआईएमआईएम को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कई राज्यों में मुस्लिम मतदाताओं ने एआईएमआईएम को धर्मनिरपेक्ष दलों के मुकाबले ज्यादा तरजीह दी है। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीट और महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में एआईएमआईएम की 13 नगर निगमों में 126 पार्षद सीटों पर जीत ने धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ये पार्टियां एआईएमआईएम को भाजपा की बी टीम बताती रही है, पर मुस्लिम मतदाता असदुद्दीन ओवैसी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। दरअसल, धर्मनिरपेक्ष पार्टियां मुस्लिम मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर इतनी मुखर नहीं हो पाती, जितनी एआईएमआईएम हो...