नई दिल्ली, अक्टूबर 21 -- विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए को लेकर केंद्र सरकार अपने रुख में बदलाव करने के पक्ष में नहीं दिख रही है। संकेत हैं कि सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में इस कानून से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ना चाहती है। विदेशी चंदे के नियमन, उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर सख्त बनाया जाएगा। एफसीआरए के तहत भारत में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और अन्य पात्र संगठनों को विदेश से मिलने वाले धन के इस्तेमाल के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है। कानून का उद्देश्य विदेशी योगदान को नियंत्रित करना और यह सुनिश्चित करना है कि प्राप्त धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हो। यह भी पढ़ें- ऐसे हिंदू संगठन क...