कटिहार, अप्रैल 18 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि सीमांचल की उपजाऊ धरती पर कभी खेती उम्मीद बोती थी, आज वही खेती चिंता काट रही है। कटिहार जिले के खेतों में धान, मक्का, गेहूं, दलहन और तेलहन की फसलें अब भी उगती हैं, लेकिन हरियाली के पीछे किसानों की बेबसी गहरी होती जा रही है। खेती के साधन बढ़े हैं, मशीनें आई हैं, बीज बदले हैं, तकनीक बढ़ी है, लेकिन किसान की आमदनी वहीं ठहरी हुई है। हालत यह है कि किसान खेत में जितना पसीना बहाता है, बाजार में उतना ही टूट जाता है।पहले खेती बैल, हल और बरसाती पानी पर चलती थी। खर्च सीमित था, मेहनत ज्यादा थी। यह भी पढ़ें- धरती पुत्रों की व्यथा: मौसम की अनिश्चितता का खेती पर पड़ा दुष्प्रभाव अब ट्रैक्टर, पावर टिलर, हार्वेस्टर, आधुनिक बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक, डीजल पंप, पाइप और मशीनों का जमाना है। सुविधा बढ़ी, लेकिन ला...