कटिहार, अप्रैल 16 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि सीमांचल की उपजाऊ धरती पर कभी तेलहन फसलों की हरियाली लहलहाती थी, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। कटिहार समेत पूरे इलाके में सरसों को छोड़ अन्य तेलहन फसलें विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। तीन दशक पहले जहां जिले में करीब 22 हजार हेक्टेयर में तेलहन की खेती होती थी, वहीं अब यह सिमटकर महज 12 हजार हेक्टेयर में रह गई है।कभी इस क्षेत्र में सूरजमुखी, मूंगफली, अलसी, सोयाबीन और अरंडी जैसी फसलें बड़े पैमाने पर होती थीं। खेतों में पीले सूरजमुखी की चमक और मूंगफली की खुशबू आम बात थी, लेकिन अब ये फसलें किसानों की यादों तक सिमट गई हैं। यह भी पढ़ें- अलसी-सरसों की फसल पर संकट, समर्थन मूल्य की मांग बदलते समय के साथ किसानों ने इनसे मुंह मोड़ लिया है और अब लगभग पूरी तरह सरसों पर ही निर्भर हो गए हैं।तेलहन के पिछ...