सासाराम, फरवरी 26 -- बिक्रमगंज, हिटी। प्रखंड के धावां गांव में आयोजित मां काली प्राण प्रतिष्ठा सह शतचंडी महायज्ञ के छठे दिन जगद्गुरु स्वामी संपत कुमाराचार्य जी ने धार्मिक प्रवचन में जीवन की नश्वरता और धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला। कहा कि मनुष्य जीवन भर धन,वैभव,संपत्ति और परिवार के मोह में बंधा रहता है। वह सोचता है कि यही सब उसकी स्थायी पूंजी है,किंतु मृत्यु के क्षण में यह भ्रम टूट जाता है। कहा धन जमीन पर ही पड़ा रह जाता है,पशु गोशाला में छूट जाते हैं,पत्नी घर के द्वार तक साथ आती है और परिजन श्मशान तक। अंततः शरीर भी चिता पर जलकर समाप्त हो जाता है। कहा परलोक की यात्रा में यदि कोई साथ चलता है तो वह केवल व्यक्ति के द्वारा किया गया धर्म,सद्कर्म और पुण्य ही है। कहा आज के भौतिकवादी युग में लोग रिश्तों और मूल्यों से अधिक धन को महत्व देने लगे हैं...
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