देहरादून, मई 26 -- सहस्त्रधारा रोड स्थित शनि मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने श्रद्धालुओं को धर्म, विनम्रता और सदाचार का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य को धन नहीं बल्कि धर्म को बढ़ावा देना चाहिए। धर्म जब किसी व्यक्ति के जीवन में आता है तो उसके साथ विनम्रता, उदारता और सद्गुण स्वतः आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि विनम्रता धर्म का स्वभाव है, जैसे फूलों के साथ सुगंध और दीपक के साथ प्रकाश सहज रूप से जुड़े रहते हैं। यह भी पढ़ें- धन नहीं, धर्म को बढ़ावा दें : आचार्य ममगाईआचार्य ममगांई का संदेश आचार्य ममगांई ने कहा कि धन और धर्म दोनों व्यक्ति की चाल बदल देते हैं। धन आने पर मनुष्य अकड़ कर चलता है, जबकि धर्म आने पर वह विनम्र हो जाता है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि...