वाराणसी, अप्रैल 30 -- वाराणसी। धन की तीन गति दान, भोग और नाश है। इनमें दान सर्वोत्तम है। यदि परमात्मा ने धन दिया है पुण्य कार्य में खर्च करना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर लक्ष्मी ज्यादा दिन नहीं रहती हैं। श्रीधाम वृंदावन से आए भागवत मर्मज्ञ डॉ. संजय कृष्ण 'सलिल' ने यह विचार व्यक्त किया।
भगवान कृष्ण की लीला रथयात्रा स्थित कन्हैयालाल गुप्ता स्मृति भवन में बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन उन्होंने कहा कि अविद्या रूपी पूतना अपने स्तन में विष लगाकर भगवान को मारने के उद्देश्य से आई। इसके बाद भी उन्होंने उसे माता की गति प्रदान की। कहा कि गोपियों के घर माखन चोरी में भगवान कृष्ण की जनकल्याण भावना निहित है। भागवत मर्मज्ञ ने गोवर्धन लीला का मार्मिक वर्णन किया।
गिरिराज नारायण की महिमा कहा कि गिरिराज नारायण का साक्षात स्वरूप हैं। ब्रज पर जब विपत...
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