देहरादून, मई 27 -- देहरादून, वरिष्ठ संवाददाता। सहस्त्रधारा रोड शनि मंदिर में चल रही भागवत कथा में कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने बुधवार को हुई कथा के माध्यम से कहा कि धन नहीं धर्म को बढावा देना चाहिए।जब धर्म किसी व्यक्ति के जीवन में आता है तो वह अपने साथ उदारता व विनम्रता जैसे अनेक सद्गुणों को लेकर आता है। विनम्रता धर्म की अनिवार्यता नहीं अपितु धर्म का स्वभाव है। धर्म के साथ विनम्रता ऐसे ही सहज चली आती है, जैसे फूलों के साथ सुगंध और दीये के साथ प्रकाश। धन आने के बावजूद भी जो उस संपत्ति रूपी लक्ष्मी का सदुपयोग करे और अपने जीवन को विनम्र भाव से जिए उससे श्रेष्ठ कोई साधक नहीं हो सकता। यह भी पढ़ें- धन और धर्म जीवन की चाल बदल देते हैं: आचार्य ममगांई इस अवसर पर आचार्य रमेश उनियाल, नन्दन सिंह बिष्ट, रेखा विष्ट, मंजू उर्वी, शशि मुरारका, नितेश...