धनुष यज्ञ और लक्ष्मण परशुराम संवाद का मार्मिक वर्णन
सोनभद्र, मई 21 -- घोरावल। मानव जीवन को सुख साधन से नहीं अपितु साधना से प्राप्त होता है। यदि साधना और साधन में समन्वय हो जाए तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। उक्त बातें घोरावल विकास खंड के पेढ़ ग्राम स्थित हनुमान मंदिर पर चल रहे सात दिवसीय पंचकुंडात्मक शिव शक्ति महायज्ञ में व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए महीसागर गुजरात से आए हुए आचार्य सुमन पुरी ने व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मानव जीवन प्राप्त करना बहुत ही दुर्लभ है, लेकिन इसे साधना के स्थान पर साधन इकट्ठा करने में लोग व्यर्थ जीवन गवा देते हैं। उन्होंने भगवान के चरणों में लव लगाने और पांच विकारों से मुक्ति को ही जीवन का ध्येय बताया। इसके पूर्व धनुष यज्ञ एवं लक्ष्मण परशुराम संवाद का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान परशुराम धनुष भंग होने से क्यों नाराज हो गए थे। इसकी कथा का...
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