भभुआ, जनवरी 20 -- मिट्टी-मोरम की बदहाल सड़क से गर्भवती को प्रसव पीड़ा के दौरान अपने गांव से अस्पताल पहुंचने में होती है दिक्कत पहाड़ की घाटी चढ़ते-उतरते समय गर्भवती को अनहोनी की बनी रहती है आशंका अपने साथ मिट्टी मोरम बहा ले जाती हैं उफनाती पहाड़ी नदियों और पहाड़ का पानी (हिन्दुस्तान खास) उमाशंकर सिंह अधौरा। कैमूर पहाड़ी और जंगल से घिरे अधौरा की गर्भवती महिलाएं प्रसव होने से दो माह पहले अपने घर-परिवार को छोड़ देती हैं। क्योंकि गर्भावस्था में उन्हें पहाड़ की घाटी चढ़कर और उतरकर आने-जाने में खतरा बना रहता है। जंगल और चट्टान पार करने में जानवरों के हमले और गिरकर चोटिल होने का भय बना रहता है। अधिकतर गांव मिट्टी-मोरम की सड़क से जुड़े हैं। बरसात में पहाड़ी नदियां उफान पर होती हैं। तब पानी की धार मिट्टी-मोरम को अपने साथ बहा ले जाती है। पानी की धार इतनी तेज हो...
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