सिमडेगा, जुलाई 5 -- सिमडेगा वक्त का पहिया जब दो दशक पीछे घूमता है तो एक ऐसी सुनहरी दास्तान उभर कर आती है जिस पर आज की पीढ़ी को शायद यकीन न हो। यह कहानी है गुमला और सिमडेगा के बीच उस कृषि ब्यापार की जिसने इलाके के किसानों और व्यापारियों को समृद्धि के शिखर पर पहुँचाया था। आज से करीब बीस साल पहले सिमडेगा के महज 8 से 10 ब्यापारी गुमला में उपजने वाली खास फरसबीन के दम पर सीजन में लाखों रुपये का कारोबार करते थे। उस दौर में गुमला की पहचान बड़े पैमाने पर होने वाली लतर वाली एकदम देसी और उच्च गुणवत्ता वाली फरसबीन से थी। सबसे खास बात यह थी कि यहाँ उत्पादित होने वाली इस फरसबीन की धमक सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं थी बल्कि इसका जाल पूरे देश के बड़े बाजारों में फैला हुआ था। भरत प्रसाद के अनुसार आम दिनों में गुमला जिले के केंद्रों से प्रतिदिन लगभग ...