वाराणसी, मार्च 1 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी में देवस्थान और महाश्मशान दोनों का महत्व है। यहां जन्म और मृत्यु, दोनों को मंगल माना जाता है। रंगभरी एकादशी पर गृहस्थों के साथ होली खेलने के बाद द्वादशी तिथि पर शनिवार को बाबा ने अपने गणों, भूत-प्रेतों के साथ महाश्मशान में होली खेली। इस परंपरा के तहत शोकाकुल लोगों से भरा रहने वाला मणिकर्णिका घाट लगभग दो घंटे के लिए उत्सव स्थल में तब्दील हो गया। शवदाह के लिए पहुंचे लोग भी अपना दुख भूलकर इस उत्सव का हिस्सा बने। विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने इस वर्ष व्यापक बंदोबस्त किए थे। चौक क्षेत्र में मणिकर्णिका द्वार के सामने दूर तक जनसैलाब उमड़ा रहा। आमतौर पर ऐसा दृश्य काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ के दौरान देखने को मिलता है, लेकिन शनिवार को यह भीड़ मणिकर्णिका घाट की ओर बढ़ रही थ...