वाराणसी, मई 29 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पं.कांतानाथ पांडेय अपने दो उपनामों से साहित्य की दो धाराओं को जीते थे। एक विधा में हास्य की पराकाष्ठा तो दूसरी में हाशिए पर रहने वालों की चिंता। कई बार तो यह अंतर करना मुश्किल हो जाता कि 'चोंच' और 'राजहंस' दोनों एक ही व्यक्ति हैं।

पं. कांतानाथ पांडेय और पं. द्विजेंद्रनाथ मिश्र ये बातें वरिष्ठ कवि शिवकुमार 'पराग' ने कहीं। वह पं.विद्यानिवास मिश्र जयंती वर्ष के अंतर्गत गुरुवार को विद्याश्री न्यास की ओर से आयोजित व्याख्यानमाला 'हिंदी की धरोहर : काशी की सृजन-परंपरा' की 14वीं कड़ी में मुख्य वक्ता थे। अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय के सभागार में हुआ यह सत्र पं.कांतानाथ पांडेय 'चोंच' एवं पं.द्विजेंद्रनाथ मिश्र 'निर्गुण' पर केंद्रित था।

कांतानाथ पांडेय की रचनाएँ समारोह में कांतानाथ पांडेय चोंच की ...