रांची, मई 21 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल दोस्ताना लेन-देन को कानूनी रूप से वसूले जाने योग्य कर्ज नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर दो आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए शिकायतकर्ता की अपील खारिज कर दी। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत जमशेदपुर के न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। मामले में शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसने 3 जनवरी 2007 को आरोपी को कारोबार में मदद के लिए दो लाख रुपये का दोस्ताना कर्ज दिया था। इसमें एक लाख रुपये चेक और एक लाख रुपये नकद दिए गए थे। आरोप था कि इसके बदले आरोपी ने सुरक्षा के तौर पर डेढ़ लाख और 50 हजार रुपये के दो पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे। बाद में खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने ...