नई दिल्ली, फरवरी 10 -- देश में मुकदमों के बोझ से दबी जिला अदालतों में प्रति दस लाख जनसंख्या पर महज 22 जज हैं, जबकि विधि आयोग और संविधान पीठ के फैसले के मुताबिक 2007 तक ही 50 जज होने चाहिए थे। इतना ही नहीं, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में जज और जनसंख्या का अनुपात राष्ट्रीय औसत 22 से भी कम है। यह स्थिति 2011 के जनगणना के आंकड़ों के हिसाब से है, जबकि देश की मौजूदा जनसंख्या के हिसाब यह औसत काफी कम हो सकता है। इसका खुलासा, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के विश्लेषण से हुआ। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देशभर की जिला अदालतों के लिए जज की स्वीकृत संख्या 25,439 है और इनमें से करीब 5 हजार पद रिक्त हैं। कानून मंत्रालय ने 2011 के जनगणना के आंकड़ों और देश में मौजूदा समय में जज की स्वीकृ...