नई दिल्ली, मार्च 11 -- प्रभात कुमार नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए 'देश में पहली बार एक युवक को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब पिछले 13 साल से मरणासन्न (वेजिटेटिव स्टेट) स्थिति में रह रहे ‌दिल्ली से सटे गाजियाबाद के 32 साल के युवक हरीश राणा के कृत्रिम जीवन रक्षक उपकरण हटाकर प्राकृतिक रूप से मरने का रास्ता साफ हो गया। वेजिटेटिव स्टेट, एक ऐसी अवस्था है, जिसमें व्यक्ति जाग तो रहा होता है (आंखें खुली होती हैं), लेकिन उसमें जागरूकता या सचेत प्रतिक्रियाओं का अभाव होता है। यह कोमा से अगल होता है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने लंबे समय से भावनात्मक मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को 'निष्क्रिय इच्छामृत्यु' पर एक बड़ा कानून बनान...