नई दिल्ली, जुलाई 10 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। देश भर में तमाम राज्य सरकारों द्वारा स्कूलों की संख्या को कम किया जा रहा है। छात्रों की संख्या में गिरावट का हवाला देकर स्कूलों को समाहित (मर्जर) किया जा रहा है। खासकर वर्ष 2018-19 से स्कूलों की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है जो काफी चिंताजनक है। जबकि नीति आयोग मानता है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और आधुनिक कौशल मिलेंगे। मई में नीति आयोग ने 'भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था : समय आधारित विश्लेषण और गुणवत्ता सुधार के लिए नीति रोडमैप' शीर्षक से रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2014-15 से 2017-18 के बीच स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ी और 15.16 लाख से बढ़कर 15.58 लाख तक पहुंच गई। इस दौरान सरकार ने अधिक से अधिक बच्चों तक...